Thursday, December 15, 2011

एक अजीब सी पहेली जैसे
कुछ जैसे खोता जा रहा है
किसे संभालना , किसे बचाना है
कसौटी पे  चलना है जैसे
पर न जाने क्यूँ  लगता है...
मेरे सब्र का बाँध टूटता है जैसे
होसलों से ही चलती अगर जिंदगी मेरी
तो शायद मंजिल पा गयी होती ..
है कैसी ये बेबसी ...
इक्तियार नही जैसे मेरा..
खुद को भूलने लगी हूँ
हर बार गिरती हूँ उठती हूँ
देती हूँ होसला खुद को.
बस अब लगता है की
कुछ बाकि नही रहा ..
हो रहा चकनाचूर कुछ..
कुछ जैसे टूट रहा.
कुछ जैसे खो रहा.......!!!!!


Thursday, October 20, 2011

हर एक ख्याल को उसका मुक्कमल जहाँ मिल जाए तो क्या बात है,
हर अल्फाज उसके साहिल को मिल जाए तो क्या बात है|
पर हर मोड़ पर मुसाफिर ठहर नही सकता .
हर मोड़ को अपनी मंजिल से जोड़ नही सकता |
कितना अजीबो गरीब रिश्ता है राह और राही का 
कोई और उसे समझ नही सकता |
क्या उसके साहिल की पहचान कौन कह पाए 
एक उसका दिल समझे और एक वो समझ पाए  |


Saturday, October 15, 2011

काश मैं खुद को समझ पाती
अपनी कही अनकही बातें
है कितना मुश्किल खुद से मिलना 
क्या हम बेगानों की बात करें|
हर लफ्ज़  खुद मुझ से बेगाना मेरा
जज्बातों के बहाव मैं कभी बह जाती 
कभी पाषाण ह्रदय बन जाती|
कभी छोटी सी भी बात चुभ जाती 
कभी हर बात से बेपरवाह हो जाती |
क्या कहे उस इन्सान का 
जो खुद ही खुद से न मिल पाए
क्या किसी और से मिलना |
है कई सवाल खुद से 
है कई जबाब उनके 
पर किस  जबाब को दिल माने सही 
किस जबाब को नकारे मन मेरा
है उल्जनो  का ये सफ़र 
लेने कही निर्णय महत्वपूर्ण 
करनी तय भूमिका निर्णायक |
है एक ही सवाल खुद से 
पर उस का ही जवाब नही |

  
 


Tuesday, October 11, 2011

Raahein

ख्वाइशे  कुछ हैं पर उनका मोल नहीं 
हैं क्या सपने क्या हकीक़त 
इसका भी अब कुछ होश नही 
चलते जा रहे पर हम 
पर किस ओर  पता नही
पर एक बात समझ आई 
किसी का मोल हो न हो 
पर ये राहें अनमोल है
लक्ष्य के वास्तविक मूल्य को समझाती हमे
बिना इन मुश्किल भरे रास्तों के 
जीवन का कोई अर्थ नहीं
एक एहसास दिलाते हमे ये रास्ते 
कितना कुछ पाया हमने 
हर छोटी छोटी बातों की
कीमत सीखला  गए
ख़ुशी कितनी इस सफ़र मैं 
और कितना सकूंन हैं 
की हम अपने पथ पर निरंतर अडिग है
हाँ मेरे लिए ये सफ़र अब 
मंजिल से भी ज्यादा अजीज है
जो राही मिले इन राहों मैं
वो मेरी मुश्किल के साथी है
एक अजीब का रिश्ता हैं 
इन राहों का इन साथियो का
अब मंजिल का इन्तजार है
कब इस सफ़र को इसका
मुकाम मिलेगा 
पर ये राहें हमेशा दिल के कोने में
यादगार रहेगी हमेशा 



Monday, September 26, 2011

ek adhoori daastan hoo ya
Parchaiyon ka saaya ya
Ye kahoon ek kuhasa..
Khud apne hi astitva se begaani .
Kho si gayi kahi is kohraam main ………
Ek adhoore se kavya ka hissa
Ek aisa patra hoon shayaad ..
Jisse nepathya ke liye hi racha ho??

Tuesday, September 6, 2011

sach

हर एक का अपना अपना सच 
किसी के नजरिये से ये सच
तो किसी के नजरिये से वो सच 
है सब की अलग अलग परिभाषा
कहते हैं ये दुनिया सच नहीं
फिर किस भ्रम मैं जीते हम 
अगर सोच के देखो 
तो कुछ भी सच नही
फिर किस सच की ओर जाते हम
द्रष्टि का हेर हैं या फिर
हमारे दिल का फेर हैं
मेरा सच क्यूँ जुदा सबसे 
मन के किसी कोने में 
बस यही एक सवाल 
आखिर हैं क्या सच


--नेहा 

Sunday, September 4, 2011


Ek khwab tha adhoora sa…
Dil k kissi kone main saza tha
Kuch baatein unkahi si
Samay k saath unsuni rahi..
Ek peer thi in dragoo main
Bekadri ka chashma pehne
Na koi aawaz , na koi kampan
Par h janaza kissi k dil ka
Hai khamoshi kissi ki
Unsuni jo rah gayi
Rah gaya ye kavya adhoora
Tilanjali kissi sapne ki…..



koshish

Khoi chahton ko sametne ki koshish 
Tute sapno ko fir se jodne ki koshish
Jadasth hone pe fir jeene ki koshish
Yahi koshish hi to hai jo
hai pehchan insan ki
      Ladkadakar girne pe , 
       chotil hone pe 
      karna fir chalne ki koshish
      dekna naye sapno ko 
      rakna nayi manjilon pe kadam .
      Yahi koshish hi to hai jeene ki
             Yahi koshish dikhlati marg humme
              Aasha ka vishwas ka 
              Dradta se samna karna humme 
              Haar ho ya jeet 
              humari aviram chalne ki koshish