काश मैं खुद को समझ पाती
अपनी कही अनकही बातें
है कितना मुश्किल खुद से मिलना
क्या हम बेगानों की बात करें|
हर लफ्ज़ खुद मुझ से बेगाना मेरा
जज्बातों के बहाव मैं कभी बह जाती
कभी पाषाण ह्रदय बन जाती|
कभी छोटी सी भी बात चुभ जाती
कभी हर बात से बेपरवाह हो जाती |
क्या कहे उस इन्सान का
जो खुद ही खुद से न मिल पाए
क्या किसी और से मिलना |
है कई सवाल खुद से
है कई जबाब उनके
पर किस जबाब को दिल माने सही
किस जबाब को नकारे मन मेरा
है उल्जनो का ये सफ़र
लेने कही निर्णय महत्वपूर्ण
करनी तय भूमिका निर्णायक |
है एक ही सवाल खुद से
पर उस का ही जवाब नही |
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