ख्वाइशे कुछ हैं पर उनका मोल नहीं
हैं क्या सपने क्या हकीक़त
इसका भी अब कुछ होश नही
चलते जा रहे पर हम
पर किस ओर पता नही
पर एक बात समझ आई
किसी का मोल हो न हो
पर ये राहें अनमोल है
लक्ष्य के वास्तविक मूल्य को समझाती हमे
बिना इन मुश्किल भरे रास्तों के
जीवन का कोई अर्थ नहीं
एक एहसास दिलाते हमे ये रास्ते
कितना कुछ पाया हमने
हर छोटी छोटी बातों की
कीमत सीखला गए
ख़ुशी कितनी इस सफ़र मैं
और कितना सकूंन हैं
की हम अपने पथ पर निरंतर अडिग है
हाँ मेरे लिए ये सफ़र अब
मंजिल से भी ज्यादा अजीज है
जो राही मिले इन राहों मैं
वो मेरी मुश्किल के साथी है
एक अजीब का रिश्ता हैं
इन राहों का इन साथियो का
अब मंजिल का इन्तजार है
कब इस सफ़र को इसका
मुकाम मिलेगा
पर ये राहें हमेशा दिल के कोने में
यादगार रहेगी हमेशा
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