Tuesday, October 11, 2011

Raahein

ख्वाइशे  कुछ हैं पर उनका मोल नहीं 
हैं क्या सपने क्या हकीक़त 
इसका भी अब कुछ होश नही 
चलते जा रहे पर हम 
पर किस ओर  पता नही
पर एक बात समझ आई 
किसी का मोल हो न हो 
पर ये राहें अनमोल है
लक्ष्य के वास्तविक मूल्य को समझाती हमे
बिना इन मुश्किल भरे रास्तों के 
जीवन का कोई अर्थ नहीं
एक एहसास दिलाते हमे ये रास्ते 
कितना कुछ पाया हमने 
हर छोटी छोटी बातों की
कीमत सीखला  गए
ख़ुशी कितनी इस सफ़र मैं 
और कितना सकूंन हैं 
की हम अपने पथ पर निरंतर अडिग है
हाँ मेरे लिए ये सफ़र अब 
मंजिल से भी ज्यादा अजीज है
जो राही मिले इन राहों मैं
वो मेरी मुश्किल के साथी है
एक अजीब का रिश्ता हैं 
इन राहों का इन साथियो का
अब मंजिल का इन्तजार है
कब इस सफ़र को इसका
मुकाम मिलेगा 
पर ये राहें हमेशा दिल के कोने में
यादगार रहेगी हमेशा 



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