Tuesday, September 6, 2011

sach

हर एक का अपना अपना सच 
किसी के नजरिये से ये सच
तो किसी के नजरिये से वो सच 
है सब की अलग अलग परिभाषा
कहते हैं ये दुनिया सच नहीं
फिर किस भ्रम मैं जीते हम 
अगर सोच के देखो 
तो कुछ भी सच नही
फिर किस सच की ओर जाते हम
द्रष्टि का हेर हैं या फिर
हमारे दिल का फेर हैं
मेरा सच क्यूँ जुदा सबसे 
मन के किसी कोने में 
बस यही एक सवाल 
आखिर हैं क्या सच


--नेहा 

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