हर एक का अपना अपना सच
किसी के नजरिये से ये सच
तो किसी के नजरिये से वो सच
है सब की अलग अलग परिभाषा
कहते हैं ये दुनिया सच नहीं
फिर किस भ्रम मैं जीते हम
अगर सोच के देखो
तो कुछ भी सच नही
फिर किस सच की ओर जाते हम
द्रष्टि का हेर हैं या फिर
हमारे दिल का फेर हैं
मेरा सच क्यूँ जुदा सबसे
मन के किसी कोने में
बस यही एक सवाल
आखिर हैं क्या सच
--नेहा
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