हर एक ख्याल को उसका मुक्कमल जहाँ मिल जाए तो क्या बात है,
हर अल्फाज उसके साहिल को मिल जाए तो क्या बात है|
पर हर मोड़ पर मुसाफिर ठहर नही सकता .
हर मोड़ को अपनी मंजिल से जोड़ नही सकता |
कितना अजीबो गरीब रिश्ता है राह और राही का
कोई और उसे समझ नही सकता |
क्या उसके साहिल की पहचान कौन कह पाए
एक उसका दिल समझे और एक वो समझ पाए |