Thursday, October 20, 2011

हर एक ख्याल को उसका मुक्कमल जहाँ मिल जाए तो क्या बात है,
हर अल्फाज उसके साहिल को मिल जाए तो क्या बात है|
पर हर मोड़ पर मुसाफिर ठहर नही सकता .
हर मोड़ को अपनी मंजिल से जोड़ नही सकता |
कितना अजीबो गरीब रिश्ता है राह और राही का 
कोई और उसे समझ नही सकता |
क्या उसके साहिल की पहचान कौन कह पाए 
एक उसका दिल समझे और एक वो समझ पाए  |


Saturday, October 15, 2011

काश मैं खुद को समझ पाती
अपनी कही अनकही बातें
है कितना मुश्किल खुद से मिलना 
क्या हम बेगानों की बात करें|
हर लफ्ज़  खुद मुझ से बेगाना मेरा
जज्बातों के बहाव मैं कभी बह जाती 
कभी पाषाण ह्रदय बन जाती|
कभी छोटी सी भी बात चुभ जाती 
कभी हर बात से बेपरवाह हो जाती |
क्या कहे उस इन्सान का 
जो खुद ही खुद से न मिल पाए
क्या किसी और से मिलना |
है कई सवाल खुद से 
है कई जबाब उनके 
पर किस  जबाब को दिल माने सही 
किस जबाब को नकारे मन मेरा
है उल्जनो  का ये सफ़र 
लेने कही निर्णय महत्वपूर्ण 
करनी तय भूमिका निर्णायक |
है एक ही सवाल खुद से 
पर उस का ही जवाब नही |

  
 


Tuesday, October 11, 2011

Raahein

ख्वाइशे  कुछ हैं पर उनका मोल नहीं 
हैं क्या सपने क्या हकीक़त 
इसका भी अब कुछ होश नही 
चलते जा रहे पर हम 
पर किस ओर  पता नही
पर एक बात समझ आई 
किसी का मोल हो न हो 
पर ये राहें अनमोल है
लक्ष्य के वास्तविक मूल्य को समझाती हमे
बिना इन मुश्किल भरे रास्तों के 
जीवन का कोई अर्थ नहीं
एक एहसास दिलाते हमे ये रास्ते 
कितना कुछ पाया हमने 
हर छोटी छोटी बातों की
कीमत सीखला  गए
ख़ुशी कितनी इस सफ़र मैं 
और कितना सकूंन हैं 
की हम अपने पथ पर निरंतर अडिग है
हाँ मेरे लिए ये सफ़र अब 
मंजिल से भी ज्यादा अजीज है
जो राही मिले इन राहों मैं
वो मेरी मुश्किल के साथी है
एक अजीब का रिश्ता हैं 
इन राहों का इन साथियो का
अब मंजिल का इन्तजार है
कब इस सफ़र को इसका
मुकाम मिलेगा 
पर ये राहें हमेशा दिल के कोने में
यादगार रहेगी हमेशा