विश्वास होती है नीव हर रिश्ते की
एक एक त्याग से बनता है ये
एक बीज है जिसे सीचा जाता है
खुद को कुछ हद्द तक भुला जाता है
पर क्यूँ इतने यतन से बनाने के बाद
यूँही कोई इसे किसी शीशे की तरह
पल मैं कर देता है चकनाचूर
ना कोई आवाज हैं ..
ना कोई एहसास किसी को ..
पर जिसकी नीव हिली हो.
एक वही जानता है
इसके टूटने का दर्द ...
कोई समझे भी तो कैसे
पर बड़ी मुद्दत के बाद दिल करता है विश्वास
और उसी एक विश्वास की कीमत भी ..
यही दिल चुकाता है हर बार..
क्यूँ हर बार हारता है विश्वास
एक एक त्याग से बनता है ये
एक बीज है जिसे सीचा जाता है
खुद को कुछ हद्द तक भुला जाता है
पर क्यूँ इतने यतन से बनाने के बाद
यूँही कोई इसे किसी शीशे की तरह
पल मैं कर देता है चकनाचूर
ना कोई आवाज हैं ..
ना कोई एहसास किसी को ..
पर जिसकी नीव हिली हो.
एक वही जानता है
इसके टूटने का दर्द ...
कोई समझे भी तो कैसे
पर बड़ी मुद्दत के बाद दिल करता है विश्वास
और उसी एक विश्वास की कीमत भी ..
यही दिल चुकाता है हर बार..
क्यूँ हर बार हारता है विश्वास
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